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ramayan 7.51.10-11h: राजा दशरथ के ये वचन सुनकर महाबली ऋषि दुर्वासा बोले -॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.51.10-11h 
तच्छ्रुत्वा व्याहृतं वाक्यं राज्ञो दशरथस्य तु॥ १०॥
दुर्वासा: सुमहातेजा व्याहर्तुमुपचक्रमे।
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ के ये वचन सुनकर महाबली ऋषि दुर्वासा बोले -॥10 1/2॥
 
‘Hearing these words of King Dasharatha, the mighty sage Durvasa said -॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)