Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.50.8: सुत! इन नगरवासियों ने सीताजी के विषय में जो अनुचित बातें कहीं, उनके कारण श्री रामचन्द्रजी ने ऐसे यश-विनाशक कर्म करके कितना धर्म कमाया है?॥8॥ | ramayan सर्ग 7.50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
को नु धर्माश्रय: सूत कर्मण्यस्मिन् यशोहरे।
मैथिलीं समनुप्राप्त: पौरैर्हीनार्थवादिभि:॥ ८॥
अनुवाद
सुत! इन नगरवासियों ने सीताजी के विषय में जो अनुचित बातें कहीं, उनके कारण श्री रामचन्द्रजी ने ऐसे यश-विनाशक कर्म करके कितना धर्म कमाया है?॥8॥
Sut! On account of these city dwellers who spoke unjustly about Sitaji, what amount of Dharma has Sri Ramachandra Ji earned by engaging in such reputation-destroying acts?'॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥