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ramayan 7.50.3: भला, श्री रघुनाथजी के लिए इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है कि उन्हें अपनी धर्मपत्नी जनकपुत्री सीता को त्यागना पड़े?॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.50.3 
ततो दु:खतरं किं नु राघवस्य भविष्यति।
पत्नीं शुद्धसमाचारां विसृज्य जनकात्मजाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भला, श्री रघुनाथजी के लिए इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है कि उन्हें अपनी धर्मपत्नी जनकपुत्री सीता को त्यागना पड़े?॥3॥
 
Well, what could be more sorrowful for Sri Raghunatha than having to abandon his pious wife, Janaka's daughter Sita?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)