श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 50: लक्ष्मण और सुमन्त्र की बातचीत  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.50.16 
तस्याहं लोकपालस्य वाक्यं तत्सुसमाहित:।
नैव जात्वनृतं कुर्यामिति मे सौम्य दर्शनम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! मैंने निश्चय किया है कि जगत के रक्षक दशरथ के वचनों को मैं मिथ्या सिद्ध नहीं करूँगा। इस विषय में मैं सदैव सावधान रहता हूँ॥16॥
 
Soumya! I have resolved that I will not prove the words of the protector of the world, Dasharath, false. I am always cautious about this.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)