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ramayan 7.49.8-9: उन परम बुद्धिमान महर्षि को जाते देख उनके शिष्य भी उनके साथ हो लिए। कुछ देर चलकर महामति महर्षि सुन्दर अर्घ्य देने के लिए गंगाजी के तट पर उस स्थान पर आए। वहाँ आकर उन्होंने श्री रघुनाथजी की प्रिय पत्नी सीता को अनाथ-सी अवस्था में देखा। 8-9॥   |   ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  7.49.8-9 
तं प्रयान्तमभिप्रेत्य शिष्या ह्येनं महामतिम्॥ ८॥
तं तु देशमभिप्रेत्य किंचित् पद‍्भ्यां महामति:।
अर्घ्यमादाय रुचिरं जाह्नवीतीरमागमत्।
ददर्श राघवस्येष्टां सीतां पत्नीमनाथवत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन परम बुद्धिमान महर्षि को जाते देख उनके शिष्य भी उनके साथ हो लिए। कुछ देर चलकर महामति महर्षि सुन्दर अर्घ्य देने के लिए गंगाजी के तट पर उस स्थान पर आए। वहाँ आकर उन्होंने श्री रघुनाथजी की प्रिय पत्नी सीता को अनाथ-सी अवस्था में देखा। 8-9॥
 
Seeing that highly intelligent Maharishi leaving, his disciples also joined him. After walking for some time, Mahamati Maharishi came to that place on the banks of Ganga to offer beautiful Arghya. Coming there, he saw Shri Raghunathji's beloved wife Sita in an orphan-like condition. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)