Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.49.7-8h: हे प्रभु! यह धर्मपरायण स्त्री अपने लिए रक्षक ढूँढ़ रही है। अतः आप इसकी रक्षा करें।' ऋषिपुत्रों के ये वचन सुनकर धर्म को जानने वाले ऋषि ने अपनी बुद्धि से वास्तविक बात जान ली, क्योंकि उन्हें तपस्या द्वारा दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी। यह जानकर वे दौड़े हुए उस स्थान पर आए जहाँ मिथिला की पुत्री सीता बैठी थीं। | ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! यह धर्मपरायण स्त्री अपने लिए रक्षक ढूँढ़ रही है। अतः आप इसकी रक्षा करें।' ऋषिपुत्रों के ये वचन सुनकर धर्म को जानने वाले ऋषि ने अपनी बुद्धि से वास्तविक बात जान ली, क्योंकि उन्हें तपस्या द्वारा दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी। यह जानकर वे दौड़े हुए उस स्थान पर आए जहाँ मिथिला की पुत्री सीता बैठी थीं।
Lord! This pious lady is looking for a protector for herself. So please protect her.' After listening to these words of the sage's sons, the sage who knew the Dharma, found out the real thing by his wisdom because he had got divine sight through penance. After knowing this, he came running to the place where Mithila's daughter Sita was sitting. 7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥