श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.49.6 
न ह्येनां मानुषीं विद्म: सत्क्रियास्या: प्रयुज्यताम्।
आश्रमस्याविदूरे च त्वामियं शरणं गता॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हमारी समझ में वह मनुष्य स्त्री नहीं है। आपको उसका आदर करना चाहिए। चूँकि वह इस आश्रम से थोड़ी ही दूरी पर है, इसलिए वह वास्तव में आपकी शरण में आई है॥6॥
 
‘In our understanding she is not a human woman. You should treat her with respect. Since she is only a short distance away from this ashram she has actually come to you for shelter.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)