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ramayan 7.49.5: हमने अपनी आँखों से देखा है, वे जोर-जोर से रो रहे हैं और गहरे दुःख में डूबे हुए हैं। वे दुःख और पीड़ा सहने में असमर्थ हैं। वे अकेले हैं, दुखी हैं और अनाथों की तरह रो रहे हैं।॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.49.5 
दृष्टास्माभि: प्ररुदिता दृढं शोकपरायणा।
अनर्हा दु:खशोकाभ्यामेका दीना अनाथवत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हमने अपनी आँखों से देखा है, वे जोर-जोर से रो रहे हैं और गहरे दुःख में डूबे हुए हैं। वे दुःख और पीड़ा सहने में असमर्थ हैं। वे अकेले हैं, दुखी हैं और अनाथों की तरह रो रहे हैं।॥5॥
 
‘We have seen with our own eyes, they are crying loudly and are immersed in deep sorrow. They are not capable of suffering and grief. They are alone, miserable and are crying like orphans.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)