Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.49.3: वे बोले, 'भगवन्! गंगा तट पर किसी महान राजा की पत्नी हैं, जो साक्षात् देवी लक्ष्मी के समान हैं। हमने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था। वे मोहवश विकृत मुख बनाकर रो रही हैं।' | ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अदृष्टपूर्वा भगवन् कस्याप्येषा महात्मन:।
पत्नी श्रीरिव सम्मोहाद् विरौति विकृतानना॥ ३॥
अनुवाद
वे बोले, 'भगवन्! गंगा तट पर किसी महान राजा की पत्नी हैं, जो साक्षात् देवी लक्ष्मी के समान हैं। हमने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था। वे मोहवश विकृत मुख बनाकर रो रही हैं।'
They said, 'Lord! On the banks of the Ganga there is the wife of some great king, who looks like Goddess Lakshmi herself. We had never seen her before. She is crying with a distorted face due to infatuation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥