श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.49.17 
श्रुत्वा तु भाषितं सीता मुने: परममद्भुतम्।
शिरसा वन्द्य चरणौ तथेत्याह कृताञ्जलि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महर्षि की यह अद्भुत वाणी सुनकर सीता ने उनके चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर कहा, "जैसी आपकी इच्छा।"17.
 
Upon hearing this wonderful speech of the Maharshi, Sita bowed her head in salutation at his feet and with folded hands said, "As you wish." 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)