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ramayan 7.49.16: ‘कृपया मेरी यह भेंट स्वीकार करें और चिंता तथा भय से मुक्त हो जाएँ। यह सोचकर दुःख न करें कि आप अपने घर आ गए हैं।’॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.49.16 
इदमर्घ्यं प्रतीच्छ त्वं विस्रब्धा विगतज्वरा।
यथा स्वगृहमभ्येत्य विषादं चैव मा कृथा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘कृपया मेरी यह भेंट स्वीकार करें और चिंता तथा भय से मुक्त हो जाएँ। यह सोचकर दुःख न करें कि आप अपने घर आ गए हैं।’॥16॥
 
‘Please accept this offering from me and be free of worries and fear. Do not feel sad thinking that you have come to your own home.’॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)