श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.49.14 
अपापां वेद्मि सीते ते तपोलब्धेन चक्षुषा।
विस्रब्धा भव वैदेहि साम्प्रतं मयि वर्तसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'सीते! मैंने तपस्या द्वारा प्राप्त दिव्य दृष्टि से जान लिया है कि तुम निष्पाप हो। अतः हे विदेहनपुत्री! अब तुम शान्त हो जाओ। इस समय तुम मेरे साथ हो।॥14॥
 
‘Sita! I know through the divine sight I have gained through penance that you are sinless. Therefore, O daughter of Videhan! Now be at peace. At this moment you are with me.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)