श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.49.11 
स्नुषा दशरथस्य त्वं रामस्य महिषी प्रिया।
जनकस्य सुता राज्ञ: स्वागतं ते पतिव्रते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पतिव्रते! तुम राजा दशरथ की पुत्रवधू, राजा श्री राम की प्रिय पत्नी और मिथिला के राजा जनक की पुत्री हो। तुम्हारा स्वागत है॥ 11॥
 
‘Pativrate! You are the daughter-in-law of King Dasharath, the beloved consort of King Shri Ram and the daughter of King Janaka of Mithila. You are welcome.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)