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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना
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श्लोक 10
श्लोक
7.49.10
तां सीतां शोकभारार्तां वाल्मीकिर्मुनिपुङ्गव:।
उवाच मधुरां वाणीं ह्लादयन्निव तेजसा॥ १०॥
अनुवाद
महर्षि वाल्मीकि ने अपने तेज से शोक के भार से पीड़ित सीता को प्रसन्न करते हुए मधुर वाणी में कहा- ॥10॥
Sage Valmiki, rejoicing Sita, who was suffering from the weight of grief, with his brilliance, said in the sweet voice – ॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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