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ramayan 7.49.1: जहाँ सीता रो रही थी, वहाँ से थोड़ी ही दूरी पर कुछ ऋषि-पुत्र थे। उन्हें रोता देखकर वे अपने आश्रम की ओर दौड़े, जहाँ घोर तपस्या में लीन भगवान वाल्मीकि विराजमान थे॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 49: मुनि कुमारोंसे समाचार पाकर वाल्मीकि का सीता के पास आ उन्हें सान्त्वना देना और आश्रम में लिवा ले जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.49.1 
सीतां तु रुदतीं दृष्ट्वा ते तत्र मुनिदारका:।
प्राद्रवन् यत्र भगवानास्ते वाल्मीकिरुग्रधी:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जहाँ सीता रो रही थी, वहाँ से थोड़ी ही दूरी पर कुछ ऋषि-पुत्र थे। उन्हें रोता देखकर वे अपने आश्रम की ओर दौड़े, जहाँ घोर तपस्या में लीन भगवान वाल्मीकि विराजमान थे॥1॥
 
At a little distance from where Sita was crying, there were some children of sages. Seeing her crying, they ran towards their hermitage where Lord Valmiki, who was engaged in intense penance, was sitting.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)