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ramayan 7.48.3: लक्ष्मण! निश्चय ही विधाता ने मेरे शरीर को दुःख भोगने के लिए ही बनाया है। इसीलिए आज दुःखों का सम्पूर्ण समूह मूर्ति रूप में मेरे सामने प्रकट हो रहा है। 3॥   |   ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.48.3 
मामिकेयं तनुर्नूनं सृष्टा दु:खाय लक्ष्मण।
धात्रा यस्यास्तथा मेऽद्य दु:खमूर्ति: प्रदृश्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! निश्चय ही विधाता ने मेरे शरीर को दुःख भोगने के लिए ही बनाया है। इसीलिए आज दुःखों का सम्पूर्ण समूह मूर्ति रूप में मेरे सामने प्रकट हो रहा है। 3॥
 
Laxman! Surely the Creator has created my body only to suffer. That is why today the entire group of sorrows is appearing before me in the form of an idol. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)