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ramayan 7.48.23-24h: शोक से बोझिल लक्ष्मण गंगा नदी के उत्तरी तट पर पहुँचे और शोक के कारण अचेत हो गये और उसी अवस्था में शीघ्रता से रथ पर चढ़ गये।   |   ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.48.23-24h 
स गत्वा चोत्तरं तीरं शोकभारसमन्वित:॥ २३॥
सम्मूढ इव दु:खेन रथमध्यारुहद् द्रुतम्।
 
 
अनुवाद
शोक से बोझिल लक्ष्मण गंगा नदी के उत्तरी तट पर पहुँचे और शोक के कारण अचेत हो गये और उसी अवस्था में शीघ्रता से रथ पर चढ़ गये।
 
Lakshmana, burdened with grief, reached the northern bank of the river Ganga and became unconscious due to sorrow and in that state hurriedly boarded the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)