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ramayan 7.48.22-23h: यह कहकर उन्होंने सीताजी को पुनः प्रणाम किया और फिर नाव पर चढ़ गए। नाव पर चढ़ने के बाद उन्होंने केवट को नाव चलाने का आदेश दिया।   |   ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.48.22-23h 
इत्युक्त्वा तां नमस्कृत्य पुनर्नावमुपारुहत्॥ २२॥
आरुरोह पुनर्नावं नाविकं चाभ्यचोदयत्।
 
 
अनुवाद
यह कहकर उन्होंने सीताजी को पुनः प्रणाम किया और फिर नाव पर चढ़ गए। नाव पर चढ़ने के बाद उन्होंने केवट को नाव चलाने का आदेश दिया।
 
Saying this, he bowed to Sitaji again and then boarded the boat. After boarding the boat, he ordered the boatman to steer it. 22 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)