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ramayan 7.48.19-20h: सीता के ऐसा कहने पर लक्ष्मण बहुत दुःखी हुए। उन्होंने धरती पर सिर रखकर प्रणाम किया। उस समय वे कुछ भी बोल न सके।   |   ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.48.19-20h 
एवं ब्रुवन्त्यां सीतायां लक्ष्मणो दीनचेतन:॥ १९॥
शिरसा वन्द्य धरणीं व्याहर्तुं न शशाक ह।
 
 
अनुवाद
सीता के ऐसा कहने पर लक्ष्मण बहुत दुःखी हुए। उन्होंने धरती पर सिर रखकर प्रणाम किया। उस समय वे कुछ भी बोल न सके।
 
Laxman became very sad when Sita said this. He bowed his head to the ground and bowed down. At that time, he could not utter a word.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)