Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.48.12: हे रघुनन्दन! आप तो जानते ही हैं कि सीता शुद्ध चरित्र वाली हैं। वे सदैव आपका हित करने में तत्पर रहती हैं और आपके प्रति अत्यंत प्रेम और भक्ति रखती हैं॥ 12॥ | ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जानासि च यथा शुद्धा सीता तत्त्वेन राघव।
भक्त्या च परया युक्ता हिता च तव नित्यश:॥ १२॥
अनुवाद
हे रघुनन्दन! आप तो जानते ही हैं कि सीता शुद्ध चरित्र वाली हैं। वे सदैव आपका हित करने में तत्पर रहती हैं और आपके प्रति अत्यंत प्रेम और भक्ति रखती हैं॥ 12॥
Raghunandan. In fact you know that Sita is of pure character. She is always ready to do good for you and has utmost love and devotion towards you.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥