Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.48.11: लक्ष्मण! तुम मेरे लिए भीतरी महल की समस्त भद्र स्त्रियों को नमस्कार करो और उन्हें मेरा समाचार सुनाओ। साथ ही, धर्मपालन में सदैव तत्पर रहने वाले राजा को भी मेरा यह संदेश सुनाओ॥ 11॥   |   ramayan सर्ग 7.48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.48.11 
शिरसाभिनतो ब्रूया: सर्वासामेव लक्ष्मण।
वक्तव्यश्चापि नृपतिर्धर्मेषु सुसमाहित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! तुम मेरे लिए भीतरी महल की समस्त भद्र स्त्रियों को नमस्कार करो और उन्हें मेरा समाचार सुनाओ। साथ ही, धर्मपालन में सदैव तत्पर रहने वाले राजा को भी मेरा यह संदेश सुनाओ॥ 11॥
 
Lakshmana! You should greet all the respectable women of the inner palace on my behalf and convey my news to them. Also, convey this message of mine to the king who is always careful about the observance of Dharma.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)