श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 47: लक्ष्मण का सीताजी को नाव से गङ्गाजी के उस पार पहुँचाकर बड़े दुःख से उन्हें उनके त्यागे जाने की बात बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.47.3 
ततस्तीरमुपागम्य भागीरथ्या: स लक्ष्मण:।
उवाच मैथिलीं वाक्यं प्राञ्जलिर्बाष्पसंवृत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भागीरथी के दूसरे तट पर पहुँचकर लक्ष्मण के नेत्रों में आँसू भर आए और उन्होंने हाथ जोड़कर मिथिला की पुत्री सीता से कहा-॥3॥
 
Thereafter, on reaching the other bank of Bhagirathi, Lakshman's eyes filled with tears and with folded hands he said to Mithila's daughter Sita -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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