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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना
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श्लोक 4
श्लोक
7.45.4
अहं किल कुले जात इक्ष्वाकूणां महात्मनाम्।
सीतापि सत्कुले जाता जनकानां महात्मनाम्॥ ४॥
अनुवाद
मैं इक्ष्वाकु वंश के महान राजाओं के कुल में उत्पन्न हुआ हूँ। सीता भी महान राजाओं के कुलीन कुल में उत्पन्न हुई थीं॥4॥
‘I was born in the family of great kings of the Ikshvaku lineage. Sita too was born in the noble family of great kings.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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