श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.45.3 
पौरापवाद: सुमहांस्तथा जनपदस्य च।
वर्तते मयि बीभत्सा सा मे मर्माणि कृन्तति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस समय नगर और जनपद के लोगों में सीता के विषय में बहुत अधिक निन्दा-भंग हो गया है। वे मुझसे भी बहुत अधिक द्वेष रखते हैं। उनका द्वेष मेरे हृदय में चुभ रहा है॥3॥
 
‘At this time, a great deal of recrimination has spread among the people of the city and the district regarding Sita. They have a great deal of hatred towards me too. Their hatred pierces my heart.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)