श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.43.3 
एते कथा बहुविधा: परिहाससमन्विता:।
कथयन्ति स्म संहृष्टा राघवस्य महात्मन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ये सब लोग बड़े आनन्द से भरकर महात्मा श्री रघुनाथजी के सम्मुख बहुत-सी विनोदपूर्ण कथाएँ सुनाते थे॥3॥
 
All these people, filled with great joy, used to tell many humorous stories in front of Mahatma Shri Raghunathji. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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