श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.43.21 
तस्यैवं भाषितं श्रुत्वा राघव: परमार्तवत्।
उवाच सुहृद: सर्वान् कथमेतद् वदन्तु माम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भद्र के ये वचन सुनकर श्री रघुनाथजी बहुत दुःखी हुए और अपने सब मित्रों से पूछा - 'आप सब लोग कृपा करके मुझे बताइए कि यह बात कहाँ तक सत्य है?'
 
Hearing these words of Bhadra, Sri Raghunatha became very distressed and asked all his friends - 'You all please tell me, to what extent this is correct?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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