श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  7.43.17-19 
कीदृशं हृदये तस्य सीतासम्भोगजं सुखम्।
अङ्कमारोप्य तु पुरा रावणेन बलाद‍्धृताम्॥ १७॥
लङ्कामपि पुरा नीतामशोकवनिकां गताम्।
रक्षसां वशमापन्नां कथं रामो न कुत्स्यति॥ १८॥
अस्माकमपि दारेषु सहनीयं भविष्यति।
यथा हि कुरुते राजा प्रजास्तमनुवर्तते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सीता के साथ सहवास करने का सुख उसके हृदय में कैसा होगा? पहले तो रावण ने सीता को गोद में लेकर बलपूर्वक हरण किया, फिर लंका में ले जाकर अंतःपुर के क्रीड़ास्थल अशोक वनिका में रखा। इस प्रकार वह बहुत समय तक राक्षसों के वश में रही, फिर श्रीराम उससे घृणा क्यों नहीं करते? अब हमें भी स्त्रियों की ऐसी बातें सहन करनी पड़ेंगी; क्योंकि राजा जो कुछ करता है, प्रजा भी उसका अनुकरण करने लगती है।॥17-19॥
 
‘How would the pleasure of having sex with Sita feel in his heart? First Ravana forcefully kidnapped Sita by taking her in his lap, then he took her to Lanka and kept her in the Ashok Vanika, the playground of the inner palace. In this way she remained under the control of demons for a long time, then why does Shri Ram not hate her? Now we too will have to tolerate such things from women; because whatever the king does, the subjects also start imitating him.'॥17-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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