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ramayan 7.43.16: 'परन्तु एक बात तो चिन्ताजनक है, युद्ध में रावण को मारकर श्री रघुनाथजी सीता को अपने घर ले आए। सीता के चरित्र के विषय में उनके मन में कोई क्रोध या द्वेष नहीं था।॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.43.16 
हत्वा च रावणं संख्ये सीतामाहृत्य राघव:।
अमर्षं पृष्ठत: कृत्वा स्ववेश्म पुनरानयत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'परन्तु एक बात तो चिन्ताजनक है, युद्ध में रावण को मारकर श्री रघुनाथजी सीता को अपने घर ले आए। सीता के चरित्र के विषय में उनके मन में कोई क्रोध या द्वेष नहीं था।॥16॥
 
‘But one thing is disturbing, after killing Ravan in the war, Shri Raghunathji brought Sita back to his home. He did not have any anger or resentment in his mind about Sita's character.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)