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ramayan 7.43.12: श्री रघुनाथजी की यह बात सुनकर भद्र ने हाथ जोड़कर और एकाग्र मन से महाबाहु श्री रामजी से ये सुन्दर वचन कहे -॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.43.12 
राघवेणैवमुक्तस्तु भद्र: सुरुचिरं वच:।
प्रत्युवाच महाबाहुं प्राञ्जलि: सुसमाहित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी की यह बात सुनकर भद्र ने हाथ जोड़कर और एकाग्र मन से महाबाहु श्री रामजी से ये सुन्दर वचन कहे -॥12॥
 
Upon hearing Sri Raghunath say this, Bhadra, with folded hands and concentrated mind said these beautiful words to the mighty-armed Sri Rama -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)