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ramayan 7.43.1: वहाँ बैठे हुए महाराज श्री राम के पास सब ओर से नाना प्रकार की कथाएँ और हास्य-विनोद सुनाने में कुशल मित्र आकर बैठते थे॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.43.1 
तत्रोपविष्टं राजानमुपासन्ते विचक्षणा:।
कथानां बहुरूपाणां हास्यकारा: समन्तत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बैठे हुए महाराज श्री राम के पास सब ओर से नाना प्रकार की कथाएँ और हास्य-विनोद सुनाने में कुशल मित्र आकर बैठते थे॥1॥
 
Friends from all directions, skilled in narrating various kinds of stories and humour, used to come and sit near Maharaja Shri Ram who was sitting there. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)