श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.41.4 
तव शासनमाज्ञाय गतोऽस्मि भवनं प्रति।
उपस्थातुं नरश्रेष्ठ स च मां प्रत्यभाषत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आपकी आज्ञा पाकर मैं कुबेर के महल में उनकी सेवा करने गया; किन्तु उन्होंने मुझसे कहा -॥4॥
 
O best of men! Following your orders, I went to Kubera's palace to serve him; but he said to me -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)