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ramayan 7.41.21-22h: 'हवा ऐसी बहती है कि उसका स्पर्श शीतल और सुखद लगता है। हे राजन! नगर और जनपद के लोग इस नगर में कहते हैं कि हमें ऐसा प्रभावशाली राजा दीर्घकाल तक प्राप्त हो।'॥21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.41.21-22h 
वाताश्चापि प्रवान्त्येते स्पर्शयुक्ता: सुखा: शिवा:।
ईदृशो नश्चिरं राजा भवेदिति नरेश्वर:॥ २१॥
कथयन्ति पुरे राजन् पौरजानपदास्तथा।
 
 
अनुवाद
'हवा ऐसी बहती है कि उसका स्पर्श शीतल और सुखद लगता है। हे राजन! नगर और जनपद के लोग इस नगर में कहते हैं कि हमें ऐसा प्रभावशाली राजा दीर्घकाल तक प्राप्त हो।'॥21 1/2॥
 
‘The wind blows in such a way that its touch feels cool and pleasant. O King! The people of the city and the district say in this city that we should have such an influential king for a long time.'॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)