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ramayan 7.41.20: 'राजा! नगर के लोग बहुत प्रसन्न हैं। बादल अमृत के समान जल बरसा रहे हैं और समय पर वर्षा कर रहे हैं।'   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.41.20 
हर्षश्चाभ्यधिको राजञ्जनस्य पुरवासिन:।
काले वर्षति पर्जन्य: पातयन्नमृतं पय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'राजा! नगर के लोग बहुत प्रसन्न हैं। बादल अमृत के समान जल बरसा रहे हैं और समय पर वर्षा कर रहे हैं।'
 
‘King! The people of the city are very happy. The clouds are pouring water like nectar and raining on time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)