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ramayan 7.41.12: ‘विमानराज पुष्पक! यदि ऐसी बात है तो मैं आपका स्वागत करता हूँ। चूँकि कुबेर हमारे पक्ष में हैं, इसलिए हम पर मर्यादा भंग करने का आरोप नहीं लगेगा।’॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.41.12 
यद्येवं स्वागतं तेऽस्तु विमानवर पुष्पक।
आनुकूल्याद् धनेशस्य वृत्तदोषो न नो भवेत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘विमानराज पुष्पक! यदि ऐसी बात है तो मैं आपका स्वागत करता हूँ। चूँकि कुबेर हमारे पक्ष में हैं, इसलिए हम पर मर्यादा भंग करने का आरोप नहीं लगेगा।’॥12॥
 
‘Vimanaraj Pushpak! If this is the case then I welcome you. Since Kubera is in our favour we will not be accused of breaking the decorum.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)