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ramayan 7.41.1: रीछ, वानरों और राक्षसों को विदा करके महाबाहु श्री राम अपने भाइयों के साथ वहाँ सुखपूर्वक रहने लगे॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.41.1 
विसृज्य च महाबाहुर्ऋक्षवानरराक्षसान्।
भ्रातृभि: सहितो राम: प्रमुमोद सुखं सुखी॥ १॥
 
 
अनुवाद
रीछ, वानरों और राक्षसों को विदा करके महाबाहु श्री राम अपने भाइयों के साथ वहाँ सुखपूर्वक रहने लगे॥1॥
 
After bidding farewell to the bears, monkeys and demons, the mighty-armed Shri Ram along with his brothers started living there happily and joyfully. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)