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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 40: वानरों, रीछों और राक्षसों की बिदार्इ
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श्लोक 1
श्लोक
7.40.1
तथा स्म तेषां वसतामृक्षवानररक्षसाम्।
राघवस्तु महातेजा: सुग्रीवमिदमब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
इस प्रकार वहाँ सुखपूर्वक निवास करते हुए पराक्रमी श्री रघुनाथजी ने रीछ, वानरों और राक्षसों के बीच सुग्रीव से कहा:॥1॥
Thus residing there happily, the mighty Sri Raghunatha addressed Sugreeva amongst the bears, monkeys and demons and said thus:॥ 1॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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