श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  7.4.30-31 
उमयापि वरो दत्तो राक्षसीनां नृपात्मज॥ ३०॥
सद्योपलब्धिर्गर्भस्य प्रसूति: सद्य एव च।
सद्य एव वय:प्राप्तिं मातुरेव वय:समम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! तत्पश्चात् पार्वती ने यह भी वरदान दिया कि आज से राक्षसियाँ शीघ्र ही गर्भ धारण करेंगी; फिर शीघ्र ही बच्चे को जन्म देंगी और उनसे उत्पन्न बालक तुरन्त ही बड़ा होकर माता के समान आयु का हो जाएगा॥30-31॥
 
‘Prince! Thereafter Parvati also gave this boon that from today onwards the demonesses will conceive very quickly; then will deliver the child very soon and the child born to them will immediately grow and reach the same age as the mother.॥ 30-31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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