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श्लोक 7.4.30-31  |
उमयापि वरो दत्तो राक्षसीनां नृपात्मज॥ ३०॥
सद्योपलब्धिर्गर्भस्य प्रसूति: सद्य एव च।
सद्य एव वय:प्राप्तिं मातुरेव वय:समम्॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| ‘राजन्! तत्पश्चात् पार्वती ने यह भी वरदान दिया कि आज से राक्षसियाँ शीघ्र ही गर्भ धारण करेंगी; फिर शीघ्र ही बच्चे को जन्म देंगी और उनसे उत्पन्न बालक तुरन्त ही बड़ा होकर माता के समान आयु का हो जाएगा॥30-31॥ |
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| ‘Prince! Thereafter Parvati also gave this boon that from today onwards the demonesses will conceive very quickly; then will deliver the child very soon and the child born to them will immediately grow and reach the same age as the mother.॥ 30-31॥ |
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