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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.4.21 
अवश्यमेव दातव्या परस्मै सेति संध्यया।
चिन्तयित्वा सुता दत्ता विद्युत्केशाय राघव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! संध्या ने सोचा, ‘बेटी का विवाह तो किसी और से ही करना पड़ेगा, तो क्यों न इसका विवाह इससे कर दिया जाए?’ ऐसा सोचकर उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह विद्युत्केश से कर दिया।
 
Raghunandan! Sandhya thought, 'The daughter will have to be married to someone else, so why not marry her to him?' Thinking so, he married his daughter Vidyutkesh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)