Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.4.2: इस प्रकार आश्चर्यचकित होकर श्री रामजी ने सिर हिलाकर बार-बार तीन प्रकार की अग्नियों के समान तेजस्वी शरीर वाले अगस्त्यजी की ओर देखा और मुस्कुराकर पूछा -॥2॥ | ramayan सर्ग 7.4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार आश्चर्यचकित होकर श्री रामजी ने सिर हिलाकर बार-बार तीन प्रकार की अग्नियों के समान तेजस्वी शरीर वाले अगस्त्यजी की ओर देखा और मुस्कुराकर पूछा -॥2॥
After being thus astonished, Shri Rama shook his head and repeatedly looked at Agastya whose body was as radiant as the three types of fires and smilingly asked -॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥