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ramayan 7.4.18: हेतिपुत्र विद्युत्केश तेजोमय सूर्य के समान प्रकाशित होता था। वह अत्यंत तेजस्वी बालक जल में कमल के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। 18॥   |   ramayan सर्ग 7.4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.4.18 
विद्युत्केशो हेतिपुत्र: स दीप्तार्कसमप्रभ:।
व्यवर्धत महातेजास्तोयमध्य इवाम्बुजम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हेतिपुत्र विद्युत्केश तेजोमय सूर्य के समान प्रकाशित होता था। वह अत्यंत तेजस्वी बालक जल में कमल के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। 18॥
 
Hetiputra Vidyutkesha used to shine like the bright sun. That very bright child started growing day by day like a lotus in water. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)