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ramayan 7.4.10: भूख-प्यास से पीड़ित वे प्राणी अपने रचयिता ब्रह्मा के पास विनम्रतापूर्वक गए और बोले, 'अब हम क्या करें?'   |   ramayan सर्ग 7.4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.4.10 
ते सत्त्वा: सत्त्वकर्तारं विनीतवदुपस्थिता:।
किं कुर्म इति भाषन्त: क्षुत्पिपासाभयार्दिता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भूख-प्यास से पीड़ित वे प्राणी अपने रचयिता ब्रह्मा के पास विनम्रतापूर्वक गए और बोले, 'अब हम क्या करें?'
 
Those creatures, suffering from hunger and thirst, went to their creator Brahma with humility saying, 'What should we do now?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)