श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.39.5 
रामस्य बाहुवीर्येण रक्षिता लक्ष्मणस्य च।
सुखं पारे समुद्रस्य युध्येम विगतज्वरा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘श्री राम और लक्ष्मण के पराक्रम से सुरक्षित होकर हम समुद्र के उस पार भी सुखपूर्वक युद्ध कर सकते हैं।’॥5॥
 
‘Safe and secure in the might of Sri Rama and Lakshmana, we could comfortably fight on the other side of the ocean.’॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)