vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना
»
श्लोक 5
श्लोक
7.39.5
रामस्य बाहुवीर्येण रक्षिता लक्ष्मणस्य च।
सुखं पारे समुद्रस्य युध्येम विगतज्वरा:॥ ५॥
अनुवाद
‘श्री राम और लक्ष्मण के पराक्रम से सुरक्षित होकर हम समुद्र के उस पार भी सुखपूर्वक युद्ध कर सकते हैं।’॥5॥
‘Safe and secure in the might of Sri Rama and Lakshmana, we could comfortably fight on the other side of the ocean.’॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×