श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.39.1 
ते प्रयाता महात्मान: पार्थिवास्ते प्रहृष्टवत्।
गजवाजिसहस्रौघै: कम्पयन्तो वसुंधराम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
अयोध्या से प्रस्थान करके महाराज श्री राम हजारों हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकों के साथ हर्षपूर्वक आगे बढ़े, मानो पृथ्वी को हिला रहे हों।
 
Departing from Ayodhya, the great king proceeded forward joyfully with thousands of elephants, horses and infantry, as if shaking the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)