श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.38.9 
तत: प्रयाते जनके केकयं मातुलं प्रभुम्।
राघव: प्राञ्जलिर्भूत्वा विनयाद् वाक्यमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जनकजी के चले जाने पर श्री रघुनाथजी ने हाथ जोड़कर अपने मामा राजा युधाजित् से, जो अत्यन्त बलवान थे, विनयपूर्वक कहा- 9॥
 
After Janakji left, Shri Raghunathji folded his hands and politely said to his maternal uncle King Yudhajit, who was very powerful – 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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