श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.38.6 
स तथेति तत: कृत्वा राघवं वाक्यमब्रवीत्।
प्रीतोऽस्मि भवता राजन् दर्शनेन नयेन च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब जनक ने 'बहुत अच्छा' कहकर श्री रामचन्द्र से कहा - 'हे राजन! मैं आपके दर्शन और न्याय के अनुसार आपके आचरण से अत्यन्त प्रसन्न हूँ।
 
Then Janaka said, 'Very good' and said to Shri Ramchandra - 'O King! I am very pleased with your darshan and your behavior according to justice.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd