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ramayan 7.38.5: हे पृथ्वीपति! अब हमारे द्वारा दिए गए इन रत्नों को लेकर अपनी राजधानी को लौट जाओ। भरत (और उनके साथ शत्रुघ्न) तुम्हारी सहायता के लिए तुम्हारे पीछे-पीछे आएंगे।॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.38.5 
तद् भवान् स्वपुरं यातु रत्नान्यादाय पार्थिव।
भरतश्च सहायार्थं पृष्ठतश्चानुयास्यति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वीपति! अब हमारे द्वारा दिए गए इन रत्नों को लेकर अपनी राजधानी को लौट जाओ। भरत (और उनके साथ शत्रुघ्न) तुम्हारी सहायता के लिए तुम्हारे पीछे-पीछे आएंगे।॥5॥
 
Lord of the Earth! Now take these gems presented by us and return to your capital. Bharata (and along with him Shatrughna) will follow you to help you.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)