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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ
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श्लोक 4
श्लोक
7.38.4
इक्ष्वाकूणां च सर्वेषां मैथिलानां च सर्वश:।
अतुला: प्रीतयो राजन् सम्बन्धकपुरोगमा:॥ ४॥
अनुवाद
हे राजन! समस्त इक्ष्वाकुवंशी तथा मैथिल राजाओं में परस्पर सम्बन्ध के कारण जो प्रेम उत्पन्न हुआ है, वह अतुलनीय है।॥4॥
O King! The love that has grown among all the Ikshwaku dynasty and Maithil kings due to their mutual relations is incomparable. ॥ 4॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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