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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.38.33 
ऊचु: प्राञ्जलय: सर्वे राघवं गमनोत्सुका:।
पूजितास्ते च रामेण जग्मुर्देशान् स्वकान् स्वकान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, वे सब लोग जाने के लिए उत्सुक होकर हाथ जोड़कर श्री रघुनाथजी से बोले, "हे प्रभु! अब हम चलते हैं।" इस प्रकार श्री रामजी द्वारा सम्मानित होकर सभी राजा अपने-अपने देशों को लौट गए।
 
Thereafter, all of them, eager to leave, folded their hands and said to Sri Raghunatha, "O Lord! Now we are leaving." Thus honored by Sri Rama, all the kings went back to their respective countries.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे अष्टात्रिंश: सर्ग: ॥ ३ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें अड़तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)