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ramayan 7.38.30: हे श्री राम! आप जिस प्रकार हमारी स्तुति कर रहे हैं, वह आपके ही योग्य है। इस प्रकार स्तुति करने की कला हम नहीं जानते॥30॥   |   ramayan सर्ग 7.38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.38.30 
एतत् त्वय्युपपन्नं च यदस्मांस्त्वं प्रशंससे।
प्रशंसार्ह न जानीम: प्रशंसां वक्तुमीदृशीम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे श्री राम! आप जिस प्रकार हमारी स्तुति कर रहे हैं, वह आपके ही योग्य है। इस प्रकार स्तुति करने की कला हम नहीं जानते॥30॥
 
Praiseworthy Shri Ram! The way you are praising us is worthy of you only. We do not know the art of praising like this.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)