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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ
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श्लोक 3
श्लोक
7.38.3
भवान् हि गतिरव्यग्रा भवता पालिता वयम्।
भवतस्तेजसोग्रेण रावणो निहतो मया॥ ३॥
अनुवाद
'महाराज! आप हमारे स्थायी आश्रय हैं। आपने सदैव हमारा पालन-पोषण किया है। आपके बढ़े हुए तेज के कारण ही मैंने रावण का वध किया है।'
‘Maharaj! You are our permanent refuge. You have always nurtured us. It is because of your increased brilliance that I have killed Ravana.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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